मोहब्बते अली व मोहब्बते अहले बैत के नाम पर सुन्नी मुसलमानों को शिआ बनाया जा रहा है

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*🥀 सुन्नी मुसलमानों ख़बरदार होशियार! 🥀*



*⭕ मोहब्बते अली व मोहब्बते अहले बैत के नाम पर सुन्नी मुसलमानों को शिआ बनाया जा रहा है❗*

*मौला अ़ली (रद़ियल्लाहु अ़न्हु) ने फ़रमाया:*
*"لا تقولوا فى عثمان إلا خيرا...."،*
*"उ़स्माने ग़नी के बारे में सिवा भलाई के कुछ न कहो...."*

*📚 किताबुल् मस़ाह़िफ़ (इमाम इब्ने अबी दाऊद), पेज नं. 96*

♦️ हम सुन्नियों का दोटोक अ़क़ीदा ये है कि आक़ा (ﷺ) के बाद, जो ख़िलाफ़त की तरतीब है, वही फ़ज़ीलत की तरतीब है. यानी: जो जिस नंबर पर ख़लीफ़ा बना, उसका मर्तबा भी उसी नंबर पर है. (ये आसानी से याद करने के लिए कहा जा रहा है, ऐसा हरगिज़ नहीं है कि ख़लीफ़ा बने, इसलिए अफ़्ज़ल हैं) मतलब ये कि:

♦️सबसे पहले ख़लीफ़ा: *'ह़ज़रत अबू बक्र सिद्दीक़* (रद़ियल्लाहु अ़न्हु)' हैं, और इंसानों में, सारे नबियों के बाद सबसे बड़ा मर्तबा भी आपका ही है;
दूसरे ख़लीफ़ा: *'ह़ज़रत उ़मरे फ़ारूक़* (रद़ियल्लाहु अ़न्हु)' हैं, और आपका मर्तबा दूसरे नंबर पर है;
तीसरे ख़लीफ़ा: *'ह़ज़रत उ़स्माने ग़नी* (रद़ियल्लाहु अ़न्हु)' हैं, और आपका मर्तबा तीसरे नंबर पर है;
चौथे ख़लीफ़ा: *'मौला अ़ली* (रद़ियल्लाहु अ़न्हु)' हैं, और आपका मर्तबा चौथे नंबर पर है;

♦️ जो शख़्स, ह़ज़रत अ़ली को, ह़ज़रत अबू बक्र सिद्दीक़, और ह़ज़रत उ़मरे फ़ारूक़ (रद़ियल्लाहु अ़न्हुम्) से अफ़्ज़ल माने, वो सुन्नी नहीं, बल्कि राफ़िज़िय्यों का छोटा भाई 'तफ़्ज़ीली' है, और सुन्निय्यत से ख़ारिज है. क्यूंकि ह़ज़रत अबू बक्र सिद्दीक़, और ह़ज़रत उ़मरे फ़ारूक़ को मौला अ़ली (रद़ियल्लाहु अ़न्हुमा) से अफ़्ज़ल मानना, ज़रूरिय्याते अहले सुन्नत में से है. जिसका इंकार करने वाला, गुमराह, बद-मज़्हब, बद-अ़क़ीदा, व बिद्अ़ती है, और सुन्निय्यत से बाहर है.



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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*

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