दामादे पैयम्बर कामिलील हया व ईमान अमीरुल मुअमिनीन हजरते सय्यिदुना उस्माने गनी رَضِيَى اللَّهُ تَعَالَى عَنْهُ

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*🥀 दामादे पैयम्बर कामिलील हया व ईमान अमीरुल मुअमिनीन हजरते सय्यिदुना उस्माने गनी رَضِيَى اللَّهُ تَعَالَى عَنْهُ 🥀*



♦️हजरत उस्मान गनी सरवरे आलाम ﷺ के जलीलुल कद्र सहाबी है। आपने आगाज़े इस्लाम ही में कबूले इस्लाम कर लिया था, आपको "साहिबुल हिज- रतैन" (यानी दो हिजरतों वाले) कहा जाता है क्यूंकि आपने पहले हबशा और फिर मदीनतुल मुनव्वरह की तरफ़ हिजरत फ़रमाई ।

♦️आप का लक़ब "जुन्ननूरैन" (दो नूर वाले) भी है, क्यूं कि हमारे नबी की दो शहजादियां यके बाद दीगरे हज़रते उस्माने गनी رَضِيَى اللَّهُ تَعَالَى عَنْهُ के निकाह में थीं। इसी लिए आला हजरत फरमाते है 

*नूर की सरकार से पाया दोशाला नूर का*
*हो मुबारक तुम को जुन्नूरैन जोड़ा नूर का*

आप खु-लफ़ाए राशिदीन में तीसरे खलीफा है।
आप ने नबी ऐ करीम ﷺ से 2 मरतबा जन्नत खरीदी है एक बार यहूदी से बीरे रूमा खरीद कर वक्फ किया और एक बार जंगे तबूक के मौके पर 300 ऊंट सरोसामा इस्लाम के लिए दिए तब रावी का बयान है मैं ने देखा कि हुजूरे अन्वर मिम्बरे मुनव्वर से नीचे तशरीफ ला कर दो मर्तबा फ़रमाया : *"आज से उस्मान जो कुछ करे उस पर मुवा खज़ा (यानी पूछताछ) नहीं।"*

*आप की इबादत*
अमीरुल मुअमिनीन, हज़रते सय्यिदुना उस्माने गनी हमेशा नफ़्ली रोजे रखते और रात के इब्तिदाई हिस्से में आराम फरमा कर बक़िय्या रात क़ियाम (या'नी इबादत) करते थे।

*आप की शहादत*
18 जिल हिज्जा 35 हिजरी बरोजे जुम्मा हज़रत सय्यिदुना उस्माने गनी कुरान शरीफ की तिलावत में मशरूफ थे। चंद लोगों ने मकान की दीवार फलांग कर आप के घर में दाखिल हुवे और आप हमला किया और आप राहे हक में शहादत का जाम नोश फरमा गए।

*जिस आईना में नूर ए इलाही नज़र आए,*
*वो आईना ए रुखसार है उस्मान ए गनी का,*



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जैसे ह़ज़रते उसमाने ग़नी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के निकाह में एक के बाद दीगरे यानि 2 बेटी निकाह में आयीं इसी तरह और भी किसी नबी की 2 बेटी या हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ही की 2 साहबज़ादियां किसी के निकाह में आयीं है*

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