सुन्नी मुसलमानों ख़बरदार होशियार
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*🥀 सुन्नी मुसलमानों ख़बरदार होशियार! 🥀*
*⭕ मोहब्बते अली व मोहब्बते अहले बैत के नाम पर सुन्नी मुसलमानों को शिआ बनाया जा रहा है❗*
♦️ वह सादाते किराम, वह ख़ानक़ाहें, पिराने इज़ाम जो उलमाए अहले सुन्नत से दूर हैं उनको शिआ बनाया जा रहा है. क़व्वालीयों, महफ़िले सिमाअ, महफ़िले मिलाद, नियाज़, लंगर व उर्से औलिया, जलसे व जुलूस वगैरह प्रोग्राम में बुलाकर ब्रैनवोश कर शिआ नज़रियात परोसे जा रहें हैं.
♦️ इराक़ व ईरान की ज़ियारत टुर पेकेज में बाक़ायदा ज़हनसाज़ी की जा रही है. वहां से वापसी पर सोच बदल जाती है और वह फिर बाग़े फिदक, हज़रत उमर ने दरवाज़ा तोड़ा और हज़रत मोहसिन की वफात हुई, जंगे सिफ्फिन, जंगे नमल, बनु उमैया के सभी सलातिन से अदावत, बनु अब्बास के सभी सलातिन से नफरत, मुकद्दस हस्तियों पर लाअनो ताअन, गाली गलोच, मनघड़ंत और झ़ूटी रिवायतों पर मबनी क़िस्से कहानीयां की बातें करतें हैं. معاذ الله
♦️ बिल ख़ूसुस साहाबी ए रसुल हज़रत अमीर मुआविया और हज़रत अबु सुफ़ियान का नाम अदब और ख़ैर के साथ नहीं लेते, बल्कि उनकी बेअदबी व गुस्ताखियां करते हैं.
♦️ चंद पेशेवर नाअ्त ख़वां, क़व्वाल और शायर भी बाज़ाब्ता शिआ तरज़ पर माहोल बना रहें हैं. मोहब्बते अहले बैत की आड़ में अवाम के जज़्बात उभारकर लाशऊरी तौर पर शिआ बनाया जा रहा है.
♦️ चंद जज़्बाती मुक़र्रीर हज़रात और पाकिस्तानी टीवी एंकर्स ने आये दिन किसी भी हज़राते अहले बैत की निस्बत से यौमे विलादत और यौमे उर्स मनाने में मुसलमानों को लगा दिया. मुसलमान बेख़बरी में अच्छा समझ़कर सोशल मीडिया पर स्टेटस लगातें है उनके बहुत से शेअरो शायरी और कलाम कुफ्रो शिर्कीयात होते हैं.
♦️ अज़मते सहाबाए किराम मुसलमानों के दिलों से निकालने के लिए एक ख़तरनाक और ईमान चोर इस्तेलाह निकाली गई और केहते है "यह घर वाले और यह दर वाले" जबकि सहाबा का अहतराम वाजिब और बेअदबी कुफ्र है तो कभी कमसेकम गुमराही के हुक्म में ज़रुर है.
♦️ जो अय्याम, डे सेलिब्रेशन और तहेवार अब तक शिआ मना रहें थे अब वह सुन्नीयों में भी राइज हो रहें हैं.
यौमे विलादते अबू तालिब, उर्से अबू तालिब, यौमे मौलूदे काअबा, *ईदे ग़दीर*, ईदे मुबाहिला, इमाम हसन का दस्तरख्वान, शोहदाए करबला के चेहलुम और बहुत से यौमे विलादत वगैरह नया नया शुरू हुआ है.
♦️ अनजाने या जोशे अक़ीदत में मुसलमानों के शादी ब्याह, पैदाइश, मौत वगैरह मौक़े पर शिआ के बिदअतो रुसुमात सुन्नी मुसलमानों में रिवाज हो रहें है. जैसे कि अभी अभी एक नया रिवाज जो शियों से आया है दुल्हे के बाज़ु पर "या अली" और दुल्हन के बाज़ु पर "या फातिमा" लिखा हुआ कपड़े का बाज़ुबंद बांधने की फेशन निकली है जो पाकिस्तानी सिरियल से आयी है और अब धीरे धीरे सुन्नी मुसलमानों में फैल रही है.
☛ *एक ख़तरनाक साज़िश:* अहले बैत मे सिर्फ उन्हीं का तज़केरा किया जा रहा है जिनका तज़केरा शिआ करतें आ रहें हैं.
वालिदैन रसूल, हज़रत अब्दुल्लाह, हजरत आमिना और मुक़द्दस उम्महातुल मोमीनीन, साहिबज़ादगाने रसूल, और आले इमाम हसन को क्यों भुला दिया गया? तो क्या यह मुक़द्दस हस्तीयां अहले बैत में शुमार नहीं है? तो फिर इनका कोई ज़िक्र क्यों नहीं करते?
*■ इस पुरफितन दौर में मुसलमानों के अफ्कारो नज़रियात व एअतेक़ाद की सरहदों की हिफाज़त के लिए उल्मा ए अहले सुन्नत वल् जमाअत और सादाते किराम व बाशऊर दीनदार मुसलमानों को अपनी हस्बे हैसियत कोशिशों के साथ सरगर्मे अमल रहना होगा. सिर्फ सोशल मीडिया तक ही नहीं बल्कि अवाम में जाकर ज़मीनी सतह पर मुनज़्ज़म मंसूबाबंदी के साथ तहरीक चलाईं जाएं यह वक़्त की अहम ज़रूरत हैं.*
*याद रहे हदिस शरीफ़ में शियों को जहान्नम का कुत्ता कहा गया हैं... दुआ है कि अल्लाह करीम, हमें और तमाम मुसलमानों को शिआ और राफज़ीयत फित्ना के शर्र से बचाएं, आमीन बिजाहिन्नबी करीम सल्लल्लाहू अलयहि वसल्लम*
अहलेसुन्नत में जशने विलादत सिर्फ़ हुज़ूर ﷺ का मनाया जाता हैं, बाक़ी बुज़ूर्गों के उर्स होते हैं। लेकिन अहलेसुन्नत में कुछ लोग एक नए कल्चर को फ़रोग़ देने में लगे हैं, और जो उनक़ो सही मसअला बताए उसे ये *ख़ारजी* केहतें हैं❗
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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